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Saturday, April 10, 2021

कदाचित कालिंदी तट ---शशिप्रभा तिवारी


जयंतिका की ओर से नृत्य समारोह ‘भज गोविंदम्‘ का आयोजन दिल्ली में हुआ। यह समारोह नौ अप्रैल को इंडिया हैबिटैट सेंटर के स्टेन सभागार में आयोजित था। इस समारोह में गुरू मधुमीता राउत की शिष्याओं ने नृत्य पेश किया। गुरू शिष्य परंपरा के तहत गुरू मधुमीता राउत ने अपने पिता व गुरू मायाधर राउत से ओडिशी नृत्य सीखा। गुरू मायाधर राउत को पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी सम्मान से सम्मानित किया गया है। 

नृत्य रचना ‘भज गोविंदम‘ की शुरूआत मंगलचरण स्वरूप ‘कदाचित कालिंदी तट विपिन‘ से हुुई। यह नृत्य रचना गुरू मायाधर राउत की थी। आदि शंकराचार्य रचित जगन्नाथ अष्टकम से ली गई थी। इस रचना में श्री वंृदावन में यमुना के तट कृष्ण राधा व गोपियों से मिलते हैं। वही कृष्ण श्रीजगन्नाथ भी हैं। इन्हीं भावों को शिष्याओं ने पेश किया। इस प्रस्तुति में भूमि प्रणाम व त्रिखंडी प्रणाम विशेषतौर पर शामिल थे। इसमें शिरकत करने वाले कलाकार थे-प्रीति परिहार, वसुंधरा चोपड़ा, नित्या पंत, डाॅ प्रियंका वेंकटेश्वरन, प्रणति मालू, शाल्वी सिंह और अंजलि राॅय।



इन दिनों उत्तर भारत में बसंत की बहार है। और ऐसे में महाकवि जयदेव की अष्टपदी ‘ललित लवंग लता परिशीलन‘ को प्रस्तुत करना, अपने-आप में बहुत समीचीन है। गुरू मधुमीता राउत ने इसका चयन किया यह उनकी सराहनीय दृष्टि है। इस अष्टपदी की संगीत रचना भुबनेश्वर मिश्र की थी और नृत्य परिकल्पना गुरू मायाधर राउत की थी। बसंत ऋतु की बहार अपनी चरम पर है। सभी वृक्ष और लताएं कुसुमित-पल्लवित हैं। ऐसे समय में राधा कृष्ण के लिए व्याकुल हैं और सखी से कृष्ण के बारे में पूछती है। लास्यपूर्ण इस प्रसंग को अभिनय के जरिए चित्रित किया गया। इसमें नित्य पंत, प्रणति मालू, तारिणी सिंह, अकेशा जैन और अंजलि राॅय शामिल थे।

अभिनय अगली पेशकश थी। मध्य युगीन उड़िया गीत ‘नाचंति कृष्ण‘ पर आधारित थी। यह उड़िया राजा ब्रम्हाबर बीरबर राय की रचना है। इसकी नृत्य परिकल्पना गुरू मायाधर राउत ने की है। संगीत रचना बंकिम सेठी ने की थी। यह राग आरभि में निबद्ध थी। इस पेशकश मंे अभिनय पक्ष का सुंदर विवेचन प्रस्तुत किया। 




राग बैरागी पर आधारित बैरागी पल्लवी पेश किया। ओडिशी की तकनीकी पक्ष को विस्तार दिया गया। ओडिशी की विभिन्न भंगिमाओं और करणों को लयात्मक गतियों के जरिए निरूपित किया। उनकी अंतिम पेशकश दशावतार थी। इसमें विष्णु के दस अवतारों को वर्णित किया गया। दोनो ही नृत्य रचनाएं गुरू मायाधर राउत की थीं। इसमें प्रीति परिहार, डाॅ प्रियंका, वसुंधरा चोपड़ा, नित्या, प्रणति, तारिणी सिंह और अकेशा जैन ने नृत्य पेश किया। शिष्याओं का आपसी संयोजन और तालमेल संतुलित था। इससे उनके रियाज का सहज ही भान हो रहा था। कोविड के इस कठिन दौर में गुरू मधुमीता शिष्याओं के मनोबल को कला के जरिए बनाए हुए हैं। उन्हें कला से जोड़े हुए हैं, यह बड़ी बात है। 


2 comments:

  1. Thank you respected Shashiprabha Tiwari ji ! A review like this is such a morale booster during Covid times ! Encourages me and my students to continue with our SADHANA. 🙏 Thank you.

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  2. Wonderful recital. Kudos to everyone involved.

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